महर्षि दयानंद

ब्राह्मण वेद नहीं

– वेदप्रिय शास्त्री महर्षि दयानंद मन्त्रसंहिताओं को ही वेद स्वीकार करते हैं। ब्राह्मण भाग की वेद संज्ञा स्वीकार नहीं करते। उनसे पूर्व और उनके समय के कतिपय विद्वान् मंत्र संहिताओं के साथ ब्राह्मण भाग को भी वेद नाम देने का आग्रह करते थे। इसके लिए वे प्रमाण रूप में एक सूत्र उपस्थित करते थे जिसे …

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हिंदी और भारतीय भाषाओं का अंतर्सम्बंध: सामाजिक व सांस्कृतिक चेतना के लिए आवश्यक

विश्व आज जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें कई स्तरों पर बदलाव आए हैं। भूमंडलीकरण के कारण लोगों के सांस्कृतिक, भाषाई और देशज सोच में बदलाव आए हैं। भारतीय समाज में इस बदलाव का असर कहीं अधिक देखा जा रहा है। जिससे लोगों में मूल्यों से अधिक सुख-सुविधाओं के प्रति कहीं ज्यादा मोह बढ़ा …

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