योगेश्वर श्रीकृष्ण (भाग ३)

–  वेदप्रिय शास्त्री श्रीकृष्ण के कार्य – 7. सौभनगर की लड़ाई :-  शिशुपाल वध का समाचार सुनकर उसका एक मित्र मर्तिकावर्त (वर्तमान अलवर) का राजा शाल्व क्रोध से आग बबूला हो गया और द्वारका पर चढ़ाई कर दी । श्रीकृष्ण अभी हस्तिनापुर में ही थे । द्वारका वालों ने डटकर मुकाबला किया। कृष्ण पुत्र प्रद्युम्न के …

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योगेश्वर श्रीकृष्ण (भाग २)

–  वेदप्रिय शास्त्री श्रीकृष्ण के कार्य – 1. स्वकुल संगठन :-  सबसे पहले श्रीकृष्ण जी ने यादवों के 17 वंशों को पारस्परिक कलह व फूट से मुक्त कराकर उन्हें संगठित किया । इस हेतु उन्होंने यादवों के एक दल के नेता आहुक की पुत्री का विवाह दूसरे दल के युवा नेता अक्रूर के साथ करवा दिया …

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योगेश्वर श्रीकृष्ण (भाग १)

श्रीकृष्ण नाम सुनते ही हमारी आंखों के सामने दो तरह के चरित्र उपस्थित हो जाते हैं। एक है ‘चौर जार शिखामणि’ अर्थात चोरों और व्यभिचारयों का शिरोमणि, बांसुरी बजाने वाला, रासलीला करने वाला, परनारियों का अभिमर्षक, धूर्त और लंपट चरित्र जिससे किसी भी प्रकार से आदर्श नहीं बनाया जा सकता, भले ही वह परमात्मा का …

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पुरूषार्थ ही जीवन हैं |

ओउम् यह संसार पुरूषार्थीयों के लिए हैं| पुरूषार्थ ही जीवन हैं, प्रमाद ही मृत्यु हैं| जीवन में सफलता भाग्यवाद पर नही अपितु पुरूषार्थवाद पर निर्भर करती हैं| प्रतिपल की सजगता, जागरूकता के साथ जो आगे बढ़ते हैं, वे अपने जीवन में नीचे गिरने व भटकने से बच जाते हैं| सफलता के सूत्र सफलता की यात्रा …

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मांसाहार पर चोट।

धर्म और ईश्वर के नाम पर जानवर काटे और खाएं जायेंगे, क्या ईश्वर में दया नाम का गुण नहीं है, क्या कोई मनुष्य चाहेगा कि उसकी संतान को या परिवार के सदस्य को मारा जाए, ऐसे में भला उस परमेश्वर को क्रोध न आता होगा भला कि मेरे नाम पर कैसे पाखंड चल रहे हैं? …

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आर्य लेखक परिषद् एक परिचय

– आचार्य वेदप्रिय शास्त्री महर्षि दयानंद प्रज्ज्वलित अग्नि की ज्वाला वांछित आवश्यक समिधा, सामग्री और घृत के अभाव में शनै:-शनै: शीतल होती हुई अपनी पहचान ही खोती जा रही है । वह अग्नि जिसे कभी एंड्रोजैक्सन ने संसार के पाप भस्म कर देने वाली कहा था | आज स्वयं पाप से घिरी बुझने के लिए …

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