वेद और वेदार्थ

ब्राह्मण वेद नहीं

– वेदप्रिय शास्त्री महर्षि दयानंद मन्त्रसंहिताओं को ही वेद स्वीकार करते हैं। ब्राह्मण भाग की वेद संज्ञा स्वीकार नहीं करते। उनसे पूर्व और उनके समय के कतिपय विद्वान् मंत्र संहिताओं के साथ ब्राह्मण भाग को भी वेद नाम देने का आग्रह करते थे। इसके लिए वे प्रमाण रूप में एक सूत्र उपस्थित करते थे जिसे …

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vedpriya shastri

वेद विवेचना

वेद विवेचना – वेदप्रिय शास्त्री वैदिक वाङ्मय में ‘वेद’ शब्द दो प्रकार का मिलता है। एक आद्युदात्त और दूसरा अंतोदात्त। इनमे से प्रथम जो आद्युदात्त है, वह ज्ञान का पर्याय है! यह ‘विद् ज्ञाने’ धातु से निष्पादित है। आचार्य पाणिनी ने इसे वृषादि गण मे पढ़ा है। दूसरा वेद शब्द, जो अंतोदात्त है, वह दर्भमुष्टि …

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