साथी कहो! कहाँ से लाऊँ ?

सोए युग की आँख खोलकर,
मादकता में जहर घोल दे ।
दानवीय कारा में बन्दी,
मानवता के पाश खोल दे ।।
ऐसा गीत कहाँ से लाऊँ ।१।?
साथी कहो! कहाँ से लाऊँ ?

जो गिरते को सम्हाल लेवे,
गिरे हुए को पुनः उठा ले ।
मुरझाए को विकसित कर दे,
ठुकराए को गले लगा ले ।।
ऐसा मीत कहाँ से लाऊँ ।२।?
साथी कहो! कहाँ से लाऊँ ?

जो महलों से स्नेह बिन्दु को,
पीकर अपनी ज्योति जगा दे ।
कष्टों के कुहरे से कलुषित,
झोपड़ियों का तिमिर भगा दे,
ऐसा दीप कहाँ से लाऊँ ।३।?
साथी कहो! कहाँ से लाऊँ ?

तूफानों लहरों की टक्कर,
खा-खा कर जो हुआ हो खुर्दर,
स्निग्ध सिंधु में जो सोता हो
और उधर में भी मुक्ता हो ।
ऐसा सीप कहाँ से लाऊँ ।४।?
साथी कहो! कहाँ से लाऊँ ?

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