आर्य लेखक परिषद् देश के सभी राष्ट्रभक्त लेखको का आव्हान करती है ।

सहयोग करे

हम अपने सभी आर्य लेखक साथियों से अनुरोध व आग्रह करते हैं कि वे अपने प्रयत्न से इसे आर्थिक रूप से सृदृढ़ करें और इसके साथ पूरे मन से जुड़ें। आर्य जगत् के दानी और ऋषि भक्त जनों से भी प्रार्थना करते हैं। हमें अधिकाधिक आर्थिक सहयोग देकर हमें अर्थ चिन्ता से मुक्त कर दें ताकि हम निश्चिंत होकर करणीय कार्य कर सकें और परिषद् की ख्याति बढ़ा सकें। हम आपको वचन देते हैं कि आपके धन का कथमपि दुर्पयोग न होने देंगे और हम थोड़े में ही बहुत कुछ कर दिखाएँगे। बस एक बार हमें भरपूर सहयोग करें। हम आपको निराश नहीं करेंगे।

आशा करते हैं कि आर्य जन इस पर अवश्य ध्यान देंगे। परिषद् के आर्य लेखक सदस्यों की संख्या 170 है। वर्तमान में परिषद् का सदस्यता शुल्क वार्षिक 500 रुपये और आजीवन 1100 रुपये हैं।

आर्य जगत् के सभी छोटे -बड़े लेखकों कवियों,पत्रकारों,साहित्यकारों से हमारा निवेदन है जो परिषद् के अब तक सदस्य नहीं बनें हैं वे अब सदस्य बनें और परिषद् के साथ जुड़कर संगठित रूप में आर्य साहित्य को सशक्त और प्रभावी बनाने में सहयोगी हों।

परिषद् की भावी कार्य-योजना

परिषद् का मुख्य कार्य लेखन,सम्पादन,प्रकाशन और शोधात्मक कार्यों को बढ़ावा देना है। जिससे व्यक्ति,परिवार,समाज,देश,विश्व,संस्कृति,धर्म,कला,शिक्षा,संस्कार,वैदिक जीवन शैली और अध्यात्म का निरन्तर उन्नयन होता रहे। परिषद् अपने जन्मकाल से ही अपने सामर्थ्य के अनुसार इस प्रकार के कार्य अपने उद्देष्यों की पूर्ति के लिए करती रही है। अब जब कि पुनः परिषद् अपनी अनेक कार्य-योजनाओं और गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए आगे बढ़ रही है। कुछ कार्य-योजनाओं को मूर्तरूप दिया जा रहा है जिसमें कुछ प्रमुख हैं-

(क) आर्यसमाज प्रहरी (मासिक) पत्रिका का प्रकाशन करके इसको विस्तार देना।

(ख) वेबसाइट का निर्माण करके परिषद् के उद्देष्य,कार्य-योजना और गतिविधियों को बढ़ावा देना  और विश्व समाज को आर्य लेखक परिषद् के सम्बन्ध में परिचित कराना।

(ग) पुराने लेखकों को प्रभावी लेखन और पत्रकारिता के गुर सिखाना और नये आर्य लेखकों को उचित प्रशिक्षण देकर सशक्त पत्रकार या लेखक के रूप तैयार करना।

(घ) आर्य लेखक परिषद् के स्थाई कार्यालय के निर्माण के लिए प्रयास करना और इसके लिए आवश्यक कदम उठाना।

(ड) देश-विदेश के ऐसे वैदिक आर्य विद्वानों,कलाकारों,संस्कृति-कर्मियों और समाज सेवियों को परिषद् से जोड़ना और उनसे उचित सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त करके परिषद् को एक सशक्त संस्था के रूप में तैयार करना।

आर्य जगत् के कलम के योद्धाओं और विद्वत् जनों का यह युगधर्मी मंच सभी वैदिक धर्मियों और वैदिक धर्म से इतर व्यक्तियों से यथायोग्य सहयोग लेने  और देने का कार्य निरन्तर करते रहेगा।

(च) आंचलिक आर्य लेखकों,विद्वानों और संस्कृतिक-कर्मियों को उनकी प्रतिभा को उभारने के लिए कार्यक्रमों (प्रशिक्षणों) का आयोजन करना।

(छ) आंचलिक आर्य लेखक परिषद् समिति का गठन करना और उनके माध्यम से परिषद् की गतिविधियों-जिसमें अधिवेशन और बैठकें सम्मिलित हैं के लिए प्रयास करना।

(ज)समाज और संस्कृति में बढ़ रहे कुटेवों,अंधविश्वसों,पाखंडों,बुराइयों,स्वार्थवादी प्रवृतियों और अपसंस्कृति को रोकने के लिए ऐसे वैदिक साहित्य का प्रकाशन एवं सम्पादन करना-कराना जिससे एक आदर्श समाज एवं संस्कृति का निर्माण हो सके।

 निवेदन – आर्य लेखक परिषद् के विस्तार,गतिविधियों के संचालन, लेखक एवं पत्रकार प्रशिक्षण शिविरों के संचालन, पुस्तक एवं पत्रिका के संपादन, वेबसाईट निर्माण, परिषद् के स्थाई कार्यालय के निर्माण जैसे अतिआवश्यक कार्य के लिए धन की आवश्यकता है। सहयोग चेक, ड्राफ्ट, धनादेश आदि के माध्यम से कोटा कार्यालय को भेजा जा सकता है, या सीधे परिषद् के बैंक सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते में जमा कराया जा सकता है। पैसा जमा करने के बाद परिषद् के अध्यक्ष या मंत्री को दूरभाष पर सूचना अवश्य दे दें।

सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया
खाता संख्या – 1314123306, IFSC-CBINO281915
शाखा -2-k -29, विज्ञान नगर कोटा,(राज.)-324005

 

  कृण्वन्तो विश्वमार्यम् संकल्प के साथ

आ.वेद प्रिय शास्त्री                                      अखिलेश आर्येन्दु

अध्यक्ष                                                       मन्त्री

चलभाष : 9461477933/7665765113   चलभाष 8178710334/9868235056

फेसबुक एवं वट्सएप : आर्य लेखक परिषद् ।

अणुडाक (ईमेल) aaryalekhakparishad@gmail.com

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