आर्य लेखक परिषद् देश के सभी राष्ट्रभक्त लेखको का आव्हान करती है ।

तेरी जय हो हिंदी रानी, तेरी जय हो हिंदी रानी

–  वेदकुमार दीक्षित (देवास)

मैं हिंदी हूँ, तुम हिंदी हो, भारत माता की बिंदी हो ।
तुम जन-गण-मन में व्यापक हो, तुम इन साँसों में जिंदी हो ।
मुक्तकंठ से कवि गण गाते तेरी अमर कहानी ।। तेरी जय हो हिंदी रानी ।

भ्रमरगीत हो सूरदास कि, तुम तुलसी की रामायण हो ।
शब्द रमैनी तुम कबीर कि, तुम विद्यापति का गायन हो ।
तेरे स्वर में झलक रही है मीरा की दीवानी ।। तेरी जय हो हिंदी रानी ।

तुम अमीर खुसरो बन गाती, या रहीम बन राह दिखाती ।
सतसैया के तीर चलाती, पद्मावत से हमें रिझाती ।
मलिक जायसी और बिहारी केशव की नहीं सानी ।। तेरी जय हो हिंदी रानी ।

घनानंद रसखान सुहाते, मतिराम गिरधर भी भाते ।
तेजस्वी भूषण आभूषण बन माला में शोभा पाते ।
मुक्तक दोहा चौपाई, कुंडलियां तेरी बानी ।। तेरी जय हो हिंदी रानी ।

पंत निराला जयशंकर से, मैथिलीशरण और दिनकर जैसे ।
अज्ञेय सुभद्रा महादेवी जी, रतन तुम्हारे कैसे-कैसे ।
प्रेमचंद बन कलम सिपाही, रोज करें अगवानी ।। तेरी जय हो हिंदी रानी ।

शिवमंगल सिंह निर्मल वर्मा, माखनलाल चतुर्वेदी जी ।
कवि प्रदीप नीरज बहुतेरे ,सुमन खिल चुके तेरी बगीची ।
हाला का प्याला ले बच्चन, तुझे दे गए भरी जवानी ।। तेरी जय हो हिंदी रानी ।

सरस्वती सुत भारतेंदु भी, सदा सदा रहे तेरे आराधक ।
शुक्ल, द्विवेदी, गुलाब बाबू रामवृक्ष हरिशंकर साधक ।
कितने ही साहित्यकार, भंडार भर गए हैं  ज्ञानी ।। तेरी जय हो हिंदी रानी ।

हिंदी रानी मैं अभिमानी, यह कविता बस है नादानी ।
युग-युग कीर्ति पताका फहरे, कभी न उतरे तेरा पानी ।
मैं अबोध क्या दे पाऊंगा, मैं तो अल्पजानी ।। तेरी जय हो हिंदी रानी ।

हिंदुस्तान में रहने वालों, अपनी थाती आप सम्हालो ।
अपने देश में अपनी भाषा, इसमें नाचो, इसमें गालो ।
पढ़ो-लिखो-बोलो सब हिंदी, इसमें कैसी हानि।। तेरी जय हो हिंदी रानी ।

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